HI/Prabhupada 0121 - तो अंततः कृष्ण काम कर रहे हैं



Morning Walk At Cheviot Hills Golf Course -- May 17, 1973, Los Angeles

कृष्ण-कांति: डॉक्टर मानव के मस्तिष्क की जटिल प्रकृति पर अाश्चर्य कर रहे हैं।

प्रभुपाद: हाँ। हाँ।

कृष्ण-कांति: वे चकित हैं।

प्रभुपाद: लेकिन वे बदमाश हैं। काम करने वाला दिमाग नहीं है। यह आत्मा काम कर रही है। एक ही बात: कंप्यूटर मशीन। बदमाश को लगता है कि एक कंप्यूटर मशीन काम कर रही है। नहीं। आदमी काम कर रहा है। वह बटन दबाता है तो यह काम करती है। अन्यथा, इस मशीन की कीमत क्या है? तुम हजारों साल के लिए मशीन को रखो, यह काम नहीं करेगी। एक और आदमी जब आएगा, बटन दबाएगा, तो यह काम करेगी। तो कौन काम कर रहा है? मशीन काम कर रही है या आदमी काम कर रहा है? और आदमी भी एक और मशीन ही है। और यह परमात्मा, भगवान की उपस्थिति की वजह से काम कर रहा है। इसलिए, अंत में, भगवान काम कर रहे हैं। एक मरा हुए आदमी काम नहीं कर सकता। तो एक आदमी कितनी दिन तक जिंदा रहता है? तो जब तक परमात्मा है, आत्मा है। अगर आत्मा है, लेकिन परमात्मा उसे बुद्धि नहीं देता, वह काम नहीं कर सकता । मत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च (भ गी १५.१५) भगवान मुझे बुद्धि देते हैं, "तुम यह बटन दबाअो।" तो मैं यह बटन दबाता हूँ।

तो अंततः कृष्ण काम कर रहे हैं। कोई अप्रशिक्षित आदमी आकर उस पर काम नहीं कर सकता क्योंकि वहाँ बुद्धिमत्ता नहीं है। और अगर कोई प्रशिक्षित है, तो वह काम कर सकता है। तो यह बातें हो रही हैं। अंत में श्री कृष्ण पर बात आती है। तुम क्या बात कर रहे हो, तुम क्या शोध कर रहे हो, वह भी कृष्ण कर रहे हैं। कृष्ण दे रहे हैं ......तुमने, तुमने कृष्ण से इस सुविधा के लिए प्रार्थना की। कृष्ण तुम्हे दे रहे हैं। कभी कभी तुम पाते हो कि गलती से प्रयोग सफल हो जाता है। तो कृष्ण जब तुम्हें इतना परेशान देखते हैं प्रयोगात्मक में, "ठीक है करो।" जैसे यशोदा माँ कृष्ण को बाँधने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी। लेकिन जब कृष्ण सहमत हो गए, यह संभव हो गया। इसी प्रकार, इस दुर्घटना का मतलब है कृष्ण तुम्हें मदद कर रहे है: "ठीक है, तुमने इतनी मेहनत से काम किया है, यह परिणाम ले लो।" सब कुछ कृष्ण है। मत्त: सर्वम् प्रवर्तते (भ गी १०.८) । यह समझाया गया है। मत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च (भ गी १५.१५)। सब कुछ कृष्ण से आ रह है।

स्वरूप दामोदर: वे कहते हैं, "कृष्ण ने मुझे उचित कदम नहीं दिए कि कैसे प्रयोग करना चाहिए ।"

प्रभुपाद: हाँ, वह तुम्हें देते हैं। नहीं तो तुम कैसे यह कर रहे हो। जो भी तुम कर रहे हो, वह कृष्ण की कृपा से है। और जब तुम अौर भी अनुकूल हो जाअोगे, तो कृष्ण तुम्हें अधिक सुविधाएं दे देंगे। कृष्ण तुम्हें अधिक से अधिक सुविधा देंगे, तुम्हारा पक्ष करेंगें, तुम जितना चाहो उतना, उससे अधिक नहीं। ये यथा माम् प्रपद्यन्ते तांमस्तथैव........ जितना तुम कृष्ण के प्रति समर्पित होगे, बुद्धि उतनी ही अाएगी। अगर तुम पूरी तरह से आत्मसमर्पण करो, तो पूर्ण बुद्धिमता मिलेगी। यह भगवद गीता में कहा गया है। ये यथा माम् प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् (भ गी ४।११)