HI/681125 प्रवचन - श्रील प्रभुपाद लॉस एंजेलेस में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

From Vanipedia

HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
तो कृष्ण अपने मित्र या अपने भक्त के ढील नहीं देते हैं। क्योंकि वह ढील उनकी मदद नहीं करेगी। उनकी मदद नहीं करेंगे। कभी-कभी वह भक्त को बहुत कठोर प्रतीत होते हैं, लेकिन वह कठोर नहीं हैं। जैसे पिता बहुत सख्त हो जाते हैं। यह अच्छा है। यह सिद्ध किया जाएगा, कि कृष्ण की कठोरता कैसे उनके उद्धार को सिद्ध करेगी। अंत में अर्जुन स्वीकार करेंगे, "आपकी दया से, मेरा भ्रम अब समाप्त हो गया है।" तो इस तरह की सख्ती से .... भगवान की ओर से भक्त के लिए कभी-कभी गलत समझा जाता है। क्योंकि हम हमेशा वह स्वीकार करने के आदी होते हैं जिससे कि तुरंत बहुत प्रसन्नता प्राप्त हो, लेकिन कभी-कभी हम पाएंगे कि हमें वह नहीं मिल रहा है, जो तुरंत बहुत सुखदायक है। लेकिन हमें निराश नहीं होना चाहिए। हमें कृष्ण से जुड़े रहना चाहिए। यह अर्जुन की स्थिति है।
681125 - प्रवचन BG 02.01-10 - लॉस एंजेलेस