HI/681115 प्रवचन - श्रील प्रभुपाद लॉस एंजेलेस में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

From Vanipedia

HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
मोक्ष के बाद कृष्ण चेतना एक अवस्था है। ब्रह्मभूत। ब्रह्मभूत का अर्थ है,"मैं अब सभी भौतिक चिंताओं से मुक्त हूँ।" उसको ब्रह्मभूत अवस्था कहते हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह एक साथ वर्षों तक जेल में जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति को, और अगर उसे स्वतंत्रता दी जाती है, "अब आप स्वतंत्र हैं,"वह कितना प्रसन्न महसूस करेगा। "ओह, अब मैं स्वतंत्र हूँ।" आप समझ सकते हैं? तो वह ब्रह्मभूत अवस्था है। प्रसन्नता, हर्षित, तुरंत। और आनंद का स्वभाव क्या है? ना शोचति। यहाँ तक ​​कि महान नुकसान में, कोई विलाप नहीं है। और बड़ा लाभ, कोई प्रसन्नता नहीं है, या कोई लालसा नहीं है। इसे ब्रह्मभूत अवस्था कहा जाता है।
681115 - प्रवचन - लॉस एंजेलेस