HI/681230b बातचीत - श्रील प्रभुपाद लॉस एंजेलेस में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

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HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
"हम यह नहीं कहते कि "तुम तुम्हारे इस धर्म का त्याग कर दो। (और) तुम हमारे पास आओ।" किन्तु कम से कम तुम तम्हारे सिद्धांतों का अनुसरण करो। और... ठीक जैसे एक छात्र (अध्ययन समाप्त करने के बाद) । कभी कभी भारत में होता है कि वे, यद्यपि उन्होंने एम.ए. परीक्षा भारतीय विश्वविद्यालय में उत्तीर्ण कर ली है, वे विदेशी विश्वविद्यालय को आते है अधिक अध्ययन करने के लिए। तो वह क्यों आता है? और अधिक प्रबोधन प्राप्त करने के लिए। इसी प्रकार, किसी भी धर्मग्रन्थ का तुम अनुसरण कर सकते हो, किन्तु यदि तुम्हें अधिक प्रबोधन प्राप्त होता है यहाँ इस कृष्ण भावना आंदोलन में, (तब) क्यों नहीं तुम्हें स्वीकारना चाहिए इसको यदि तुम ईश्वर के बारे में गंभीर हो?"
681230 - Interview - लॉस एंजेलेस