HI/681230c प्रवचन - श्रील प्रभुपाद लॉस एंजेलेस में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

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HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
जैसे हरिदास ठाकुर । हरिदास ठाकुर हमेशा एकांत स्थान में जप करते थे । अब, यदि कोई व्यक्ति, इस तरह के उच्च पद पर आसीन हुए बिना सोचने लगे , "ओह, हरिदास ठाकुर एकांत में जप करते है। मुझे भी एकांत स्थान में बैठकर जप करने दो।" वह ऐसा नहीं कर सकता। यह संभव नहीं है। वह बस नकल करेंगे और सब बकवास करेंगे। इसलिए सभी को अपने काम में लगे रहना चाहिए, और अपने काम के फल से, उन्हें कृष्ण की सेवा करनी चाहिए। हम हरिदास ठाकुर की नकल नहीं कर सकते। वह एक अलग स्थिति है। यदि किसी को उस स्थिति में ऊपर उठाया जाता है, तो यह एक अलग बात है, लेकिन आम तौर पर ऐसा करना सामान्य व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं होता है। इसलिए सभी को अपना व्यावसायिक कर्तव्य करना चाहिए और अपने कार्य के परिणाम से प्रभु की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए।

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Lecture BG 03.18-30 - - लॉस एंजेलेस