HI/701220 प्रवचन - श्रील प्रभुपाद सूरत में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

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HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
"आपके पास बहुत अच्छी दवाएं हैं, दवा की दुकान है, जैसा कि आपके देश में है, लेकिन फिर भी आपको बीमारियों से पीड़ित होना पड़ता है। गर्भनिरोधक के लिए आपके पास हजारों तरीके हो सकते हैं, लेकिन जनसंख्या में वृद्धि होती है। आह। और जैसे ही मृत्यु होती है, जैसे ही यह शरीर, जन्म-मृत्यु-ज़रा-व्याधी (भ.गी. १३.९)। भगवद गीता में सबकुछ स्पष्ट रूप से कहा गया है, कि कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति अपने आगे यह स्थापित करेगा कि "हमने अपने जीवन की सभी दयनीय स्थितियों को हल कर लिया है, लेकिन इन चार सिद्धांतों को नहीं। यह संभव नहीं है, "जन्म-मृत्यु-ज़रा-व्याधी: जन्म के क्लेश, मृत्यु के क्लेश, बुढ़ापे के क्लेश और रोग के क्लेश। यह रोका नहीं जा सकता। यह केवल तभी हल किया जा सकता है जब आप कृष्ण भावनामृत हो जाएं और आश्रय, देवभूमि में वापस जाएं, बस इतना ही। अन्यथा यह संभव नहीं है।"
701220 - प्रवचन श्री.भा. ०६.०१.३८ - सूरत